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Showing posts from July, 2020

सावन के सोमवार का महत्व

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सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व है. भगवान शंकर को सावन का महीना बहुत प्रिय है इसका एक महत्व यह भी है की इस महीने में ही भगवान शंकर अपने ससुराल गये थे. माना जाता है की हर साल सावन के महीने में भगवान शंकर अपने ससुराल जाते है. सावन के महीने में भगवन शंकर की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है. मान्यता है की इस दिन भगवान शंकर की पूजा और व्रत रखने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है.  कन्याएं इस व्रत को अपना मन प्रसंद वर पाने के लिये भी करती है. सावन के सोमवार को महाशिवरात्रि के बराबर माना जाता है ,  मान्यता है कि जो कन्या सावन के सभी सोमवार का व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करती है उसे  मनचाहा वर प्राप्त होता है. सोमवार के   व्रत से   काल सर्प का   दोष भी   कम होता है   कालसर्प का दोष ज्योतिष शास्त्र में एक अशुभ योग माना जाता   है. जिस व्यक्ति   की जन्म कुंडली में काल सर्प का दोष होता है वह जीवन भर   परेशान   रहता है. हर कार्य में बाधा आती है. मानसिक तनाव बना रहता है. धन की हानि   होती है और लोगों का...

माँ हिंगला देवी मन्दिर

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आज हम जानते है माँ हिंगला देवी के बारे में जब आप लोग लोहाघाट से चम्पावत की तरफ आयेंगे तो यह स्थान आपको मिल जायेगा लोहाघाट जो चम्पावत जनपथ उत्तराखंड में स्थित है जब आप लोहाघाट से चम्पवात की तरफ चलेंगे लगभग 12 Km तक आने पर आप यहाँ से  माँ हिंगला देवी मंदिर आराम से पहुंच जायेंगे बांज के बड़े बड़े पेड़ो और घने जंगलो के बीच बसा ये स्थान इसकी एक अलग ही पहचान है  मान्यता यह है की  इस स्थान पर माँ भगवती अखिल तारणी चोटी तक झूला (हिंगोल)  झूलती थी यही कारण है की इस स्थान को हिंग्लादेवी के नाम से जाना जाता है  एक मान्यता यह भी है की इस स्थान पर एक बड़ी सीला है इस सीला पर एक दरवाजानुमा के आकृति बनी है जिसके पीछे खजाना छिपा हुआ है और इस दरवाजे की चाबी माँ हिंगला देवी के पास है इस मंदिर में साल भर लोगो का आना जाना लगा रहता है विशेषतौर पर चैत्र और शारदीय नवरात्र के समय यहाँ भक्तो की भीड़ लग रहती है  इस मंदिर की स्थापना राजा चंद के साथ आये पुजारी ने की थी पुजारी ने माता के कहने पर इस की स्थापना की जब उनके सपने में माता ने दर्शन दिया था और उनको यह बात बताई थी ...